Where have we lost the happiness?

Just another weblog

9 Posts

6 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12351 postid : 778747

डूबूँगी नहीं

Posted On: 31 Aug, 2014 Others,कविता में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

थक गयी हूँ चलते चलते
सैकड़ों मील जैसे बंजर से रेगिस्तान में
फिर भी उठ रहे हैं कदम
जाने किस गुमान में
ज़िंदा जब तक हूँ
उूबूँगी नहीं…मुझे यक़ीन हैं मैं “डूबूँगी नहीं”

जिस किनारे की ख्वाहिश की थी
न मिल पाये कभी शायद
ज़िन्दगी का रुख मेरे हिसाब से
न बदल पाये शायद
तो क्या हुआ …कहीं किसी और किनारे पहुँचूंगी तो सही
विश्वास है स्वयं पर इतना की ” मैं डूबूँगी नहीं” “कभी नहीं” !



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



अन्य ब्लॉग

  • No Posts Found

latest from jagran